Indian Chandrayaan Mission | भारत के चंद्रयान मिशन (चंद्रयान-3)

M Atul
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What is Chandrayaan Mission? चंद्रयान मिशन क्या है ?

ISRO ( Indian Space Resarah Organization) के द्वारा सन् 2008 में इस Moon Mission
What is Chandrayaan Mission? चंद्रयान मिशन क्या है ?


ISRO ( Indian Space Resarah Organization)  के द्वारा सन् 2008 में इस Moon Mission
को चलाया गया था I जिसका नाम चंद्रयान है।इस चंद्रयान का उद्देश्य चंद्रमा की सतह के विस्तृत नक्शे और पानी के अंश और हीलियम की तलाश करना और चाँद की अधिक से अधिक जानकारी प्राप्त करना।  इसरो ने अभी तक तीन चाँद मिशन (चंद्रयान-1, चंद्रयान-2, चंद्रयान-3) लॉन्च कर चुका है। जिसमें Chandrayaan-1 मिशन सफल रहा वहीं Chandrayaan-2 मिशन असफल रहा। इसरो ने न मानते हुए Chandrayaan-3 Lunch किया जो कि पूरी तरह सफल रहा है। 

Chandrayaan-1 चाँद पर पहली बार पानी की खोज 

Lunched Date- 22 Oct 
Landed Date- 8 November 
Year- 2008
Rocket Name-  PSLV-XL C11
Launch mass-  1,380 kg
Total Cost - Rs 386 crore
What's Discovered - water on the Moon's surface.



प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने साल 2003 में इस कार्यक्रम की घोषणा की थी, 15 अगस्त 2003 में  इस मिशन की शुरूआत हुई। इसके करीब 5 साल बाद भारत ने चंद्रमा के लिए भारत का पहला मिशन, 22 अक्टूबर 2008 को  श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केन्द्र से सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया था। अंतरिक्ष यान चंद्रमा के रासायनिक, खनिज और फोटो-भूगर्भिक मानचित्रण के लिए चंद्रमा की सतह से 100 किमी की ऊंचाई पर चंद्रमा के चारों ओर परिक्रमा कर रहा था। अंतरिक्ष यान में भारत, अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, स्वीडन और बुल्गारिया में निर्मित 11 वैज्ञानिक उपकरण थे। 

इसमें एक प्रोब की क्रैश लैंडिंग कराई गई थी जिसमें चांद पर पानी के बारे में पता चला। इसके चलते भारत पहला देश बन चुका है जिसने चाँद पर पानी की खोज की। 






14 नवंबर 2008 को चंद्रयान-1 ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया लेकिन तब तक उसने चांद की सतह पर पानी के अणुओं की मौजूदगी की पुष्ट कर ली गई थी. 28 अगस्त 2009 को इसरो के अनुसार चंद्रयान-1 कार्यक्रम की समाप्ति कर दी थी, लेकिन यह शुरुआत भर थी. भारत जल्द ही फिर से चांद पर तिरंगा फहराने का मन बना चुका था I 

Chandrayaan-1 ऑर्बिटर का मून इम्पैक्ट प्रोब (MIP) 14 नवंबर 2008 को चंद्र सतह पर उतरा, जिससे भारत चंद्रमा पर अपना झंडा लगाने वाला चौथा देश बन गया था

Chandrayaan-2 Unsuccessful Mission 

Lunched Date-  22 July 
Landed Date-  6 September
Year-  2019
Rocket Name-   LVM3 M1
Launch mass-  3,850 kg
Total Cost - Rs 978 crore



एक बार फिर से इसरो ने चांद की और अपना कदम बढ़ाया, Chandrayaan-2 को 22 July 2019 को 14:43 बजे, सतीश धवन अंतरिक्ष केन्द्र श्रीहरिकोटा से चंद्रयान-2 को लॉन्च किया । 20 अगस्त को Chandrayaan-2 मिशन चांद की कक्षा (Orbit) में प्रवेश किया। Chandrayaan-2 मिशन का पहला मकसद चांद के दक्षिणी ध्रुव की सतह पर सुरक्षित उतरना फिर चांद की सतह पर रोबोट रोवर संचालित करना था I  हालाँकि भारतीय समय अनुसार लगभग 1:52 बजे, लैंडर लैंडिंग से लगभग 2.1 किमी की दूरी पर अपने पथ से भटक गया और अंतरिक्ष यान के साथ ग्राउन्ड कंट्रोल ने संचार खो दिया।




8 सितंबर 2019 को इसरो द्वारा सूचना दी गई कि ऑर्बिटर द्वारा लिए गए ऊष्माचित्र से विक्रम लैंडर का पता चल गया है। परंतु अभी चंद्रयान-2 से संपर्क नहीं हो पाया है।

Chandrayaan-2 चाँद की सतह पर सुरक्षित उतरने में विफल रहा। 

Chandrayaan-3 

Lunched Date-  14 July 
Landed Date-  23 August 
Year-  2023
Rocket Name-  LVM3 M4
Launch mass- 3900 kg
Total Cost-  Rs 615 crore 


चंद्रयान-2 की विफलता के बाद करीब चार साल भारत अंतरिक्ष विज्ञान में इतिहास रचने वाला है. चंद्रयान-3 का लैंडर 23 अगस्त 2023 को शाम 5 बजकर 45 मिनट पर चांद की ओर बढ़ना शुरू किया और शाम 6 बजकर 4 मिनट पर इसरो उसकी सॉफ्ट लैंडिंग कराई। भारत दक्षिणी ध्रुव के पास उतरने वाला भारत पहला देश बन गया है । अमेरिका, रूस और चीन के बाद भारत चौथी अंतरिक्ष महाशक्ति बन गया है। इसरो की टीम की सालों की कड़ी मेहनत और हार न मानने का जज्बा है। 

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के अध्यक्ष डॉ एस सोमनाथ का चंद्रयान-3 में सबसे अहम योगदान रहा है । इन्हीं के नेतृत्व में चंद्रयान-3 मिशन आगे बढ़ा है । 

चंद्रयान-3 का लॉन्च सतीशधवनअंतरिक्षकेन्द्र, श्रीहरिकोटा  से 14 जुलाई, 2023 शुक्रवार को भारतीय समय अनुसार दोपहर 2:35 बजे लॉन्च हुआ था। 

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